राजगोपाल जी के लिए ’जनसत्याग्रह मार्च 2012‘ क्या मायने रखता है?

जनादेश 2007 हम सबके लिए एक बड़ी चुनौती थी। कई लोगों ने गंभीर रूप से संदेह जताया था कि क्या 25,000 लोग एक महीने तक चल सकते हैं? क्या बहुत अधिक लोगों के लिए इतने लंबे अरसे तक पदयात्रा को जीवंत रखना संभव हो पायेगा, वो भी दिन में केवल एक बार भोजन के साथ? क्या सरकार अंततः गरीब लोगों की आवाज सुनेगी? या उन्हें कानून और व्यवस्था द्वारा खदेड़ दिया जायेगा? जनादेश के अनुभवों और गरीब एवं सीमांत लोगों की शक्ति ने ऐसे कई संदेह को दूर कर दिया। मुझे पूर्ण विश्वास है कि बड़ी संख्या में लोग जनसत्याग्रह मार्च 2012 का भी समर्थन करेंगे।

जनसत्याग्रह मार्च 2012 पत्र लेखन के मामले में, कदमों के निशान के रूप में, वित्तीय योगदान के रूप में और लोकशक्ति के संदर्भ में चार गुना अधिक समर्थन की मांग रखता है। अतः आज ही कार्य शुरू करें। समय तेजी से गुजर जायेगा। हर स्तर पर और अधिक लोगों और संस्थाओं को जुटाव के लिए, एडवोकेसी हेतु लामबंदी के लिए और संचार माध्यमों को शामिल करने के लिए समर्थन की आवश्यकता है। 

भारत जैसे देश में जहां समस्याएं बहुत अधिक हंै, वहां बुनियादी परिवर्तन लाने के लिए एक बड़े पैमाने पर लामबंदी (जुटाव) की आवश्यकता है। हम सामाजिक और आर्थिक स्तर पर परिवर्तन को संबोधित करने की कोशिश कर रहे हैं। हम सहभागितापूर्ण लोकतंत्र और जिम्मेदार शासन की प्रक्रिया को मजबूती प्रदान करने में रूचि रखते हैं। हालांकि कार्यवाही भारत में होगी, पर हम चाहते हैं कि बड़े पैमाने पर दुनिया भर से लोग इस प्रक्रिया में जुड़ें।

हम ‘जय जगत’ और ‘सर्वोदय’ में विश्वास करते हैं - जय जगत अर्थात विश्व के लिए जीत और सर्वोदय का अर्थ है- सबकी भलाई, अंतिम व्यक्ति की भलाई के माध्यम से। आपको बहुत-बहुत धन्यवाद

राजगोपाल पी.व्ही.
राष्ट्रीय अध्यक्ष, एकता परिषद